कानपुर : छह जजर्र पुलों से गुजर रहीं 300 ट्रेनें | नहीं चेत रहा रेलवे


Originally Posted On August 6,2015 on Kanpur News

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कानपुर : हादसों के बाद भी रेल प्रशासन नहीं चेत रहा। कानपुर परिक्षेत्र में छह जजर्र पुलों से रोजाना 300 गाड़ियां पास कराई जा रही हैं। इनमें से तीन पुल तो शहर के आसपास हैं। कई पुल निर्धारित उम्र पूरी कर चुके हैं। ऐसे पुलों के सुपर स्ट्रक्चर (ट्रैक और गार्डर) की मरम्मत कराकर ट्रेनें गुजारी जा रही हैं। रेलवे इंजीनियर कह रहे हैं कि कानपुर दिल्ली और कानपुर झांसी रूट पर ट्रेनों का इतना दबाव है कि पुलों के संरक्षण पर काम नहीं हो पा रहा। वैसे भी पुलों के मरम्मत की कार्ययोजना भी नहीं भेजी गई। कासन के सहारे ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।उम्र पूरी कर चुके सभी पुल: इंजीनियरों के मुताबिक रेलवे के एक पुल की लाइफ 100 वर्ष होती है। इसे पहली बार 50वें वर्ष में रिपेयरिंग की आवश्यकता होती है। इसके बाद 75 वर्ष की उम्र में इसे रिपेयर करके 100 वर्ष तक चलने योग्य बनाया जाता है।

875कानपुर सेंट्रल के परिक्षेत्र में आने वाले आधा दर्जन पुल अपनी लाइफ पूरी कर चुके हैं। आजादी से पांच और छह दशक पहले बने पुलों को रिपेयरिंग करके आगे भी चलाने की कोशिश की जा रही है। जबकि इन पुलों के स्थान पर तत्काल नए पुल बनाकर रूट डेवलप करने चाहिए। कागजों में सिमट रहीं योजनाएं: शहर के गंगा घाट पुल, नून नदी पुल और अरौल मकनपुर पुलिया को बनाने के लिए लबे समय से कवायद चल रही है। रेल विशेषज्ञों के मुताबिक ये तीनों डेंजर जोन में हैं। इनके स्थान पर नए रूट की योजना कागजों में सिमट गई। शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में बनी पुलिया भी रिपेयरिंग के इंतजार में है। बीहाताल उतरीपुरा पुलिया, धमनी निवादा पुलिया, धौर सलार पुलिया, लालपुर पुलिया को रेल इंजीनियरों की निगाह पड़ने का इंतजार है।हर दिन गुजरते हैं लाखों यात्री: जजर्र हो चुके पुलों से हर दिन 150 ट्रेनों का आवागमन होता है। इन ट्रेनों में हर दिन लाखों लोग यात्र करते हैं। पुलों के स्लीपर खराब होने के कारण ट्रेनों को लंबे समय से कासन पर चलाया जा रहा है।

ट्रेनों का आवागमन लगातार हो रहा है। यही वजह है कि मेंटीनेंस होने में देरी हो जाती है। सुरक्षा और संरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। जजर्र पुलों की रिपेयरिंग लगातार चल रही है। जहां ज्यादा जरूरत है वहां पहले काम किया जा रहा है। राजेंद्र सिंह, पीआरओ इज्जत नगर मंडल

रेल मंत्रलय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष ज्यादा रेल हादसे हुए हैं। जून में पिछले वर्ष नार्दन रेलवे के 124 डीजल इंजन फेल हुए थे। इस वर्ष जून में 143 इंजन फेल हो गए। इसी तरह ट्रैक, डिब्बे व अन्य छोटे हादसों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। नार्दन रेलवे में जून में पिछले वर्ष 51 हादसे हुए थे, वहीं इस वर्ष 58 हुए हैं। सिग्नल फेल भी खूब हुए हैं। इसी माह में 7381 सिग्नल फेल हो गए हैं। जबकि पिछले वर्ष इनकी संख्या 6997 ही थी। इन्हीं के तरह पूरे देश में गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष ज्यादा हादसे हुए हैं।

रेल पुल को दो हिस्सों में बांट कर मरम्मत व निर्माण जैसे काम किए जाते हैं। ऊपरी हिस्से जिस पर पटरी रखी होती है उसे रेलवे की भाषा में सुपर स्ट्रक्चर कहते हैं। नीचे पिलर वाला हिस्सा सब स्ट्रक्चर कहलाता है। आमतौर पर पुलों की रिपेयरिंग करने के दौरान सुपर स्ट्रक्चर पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। इस कारण यह भी है कि पिलरों की मरम्मत आसान नहीं है। आपने भी कभी पुल के निचले हिस्से में काम करते या पिलर के बगल में दूसरा पिलर खड़ा करते रेल इंजीनियर नहीं देखे होंगे। जबकि यात्रियों की जिंदगी सब स्ट्रक्चर पर टिकी है।

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