कंपू में पहरेदार के रूप में विराजमान हैं दशानन

कानपुर कार्यालय : दशहरे पर शहर का प्राचीन दशानन मंदिर भी भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा। पूरे विश्व में सिर्फ दो जगहों पर रावण का पूजन होता है। इसमें विदिशा के बाद अपना शहर कानपुर भी है। शिवाला मंदिर में दशानन शिव व शक्ति के पहरेदार के रूप में स्थापित है। मंदिर के व्यवस्थापक की मानें तो यहीं पहरेदार शहर में भी शांति और सौहार्द कायम करने में सहायता करता है। जिस वक्त पूरा देश रावण दहन की तैयारी कर रहा होता है उस समय शहर में रावण का जन्मदिन मनाते हुए भक्त उसका पूजन करते हैं। मां भक्त मण्डल के संयोजक केके तिवारी ने बताया कि रावण का जन्म और मृत्यु एक ही दिन हुई। इसलिए आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को ही रावण के मंदिर के पटों को खोलकर शाम तक उन्हें वर्षभर के लिए बंद कर दिया जाता है। रावण का पूजन शहर में लगभग दो सौ वर्षो से हो रहा है। दशानन भक्त लंकेश का पूजन कर उनसे वही शिक्षा मांगते हैं जो दशानन ने मृत्यु के समय प्रभु राम के छोटे भाई लक्ष्मण को दिया था यानी भक्त लंकेश को पूजकर समय का महत्व, बुद्धि, विवेक व अहंकार को त्यागने का वरदान मांगते हैं। पूजन के दौरान नीले पुष्प व सरसो का तेल दशानन को अर्पित किया जाता है।

एमपी के विदिशा के बाद शहर में है लंकेश का मंदिर

 

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