कानपुर : अपने शहर के नर्सिग होम आग से महफूज नहीं हैं – हैलट, उर्सला और कार्डियोलॉजी सबसे सुरक्षित

कानपुर : अपने शहर के नर्सिग होम मरीजों की जान से खेल रहे हैं। अधिकतर प्राइवेट अस्पतालों में आग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। अधिकतर नर्सिग होमों के पास फायर विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं है फिर भी वह धड़ल्ले से चल रहे हैं। भुवनेश्वर के अस्पताल में आग से बड़े हादसे के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी चेते हैं। सभी 375 नर्सिग होमों को ई-मेल के जरिए नोटिस दे दिया गया है। गली मोहल्लों में नर्सिग होम चल रहे। कुछ नर्सिग होम तो तीन माले के हैं। तीसरे माले पर उनकी ओटी है और आईसीयू है। दमकल वाहनों को वहां पहुंचना मुश्किल है। फायर फाइटिंग के नाम पर दो बाल्टी बालू और चार पांच ¨स्टगविशर लगे हुए हैं। ओटी और आईसीयू तक पानी की पाइप लाइन और ऑक्सीजन गैस लाइन की सुविधा राम भरोसे चल रही है। एक दर्जन ऐसे नर्सिग होम हैं जिनमें तीसरे माले पर आईसीयू चल रही है लेकिन मरीजों के लिए रैम्प की सुविधा नहीं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि कभी भी बड़ा हादसा संभव है क्योंकि अभी तक लाइसेंस नवीनीकरण के समय दिए शपथ पत्र के आधार पर भौतिक सत्यापन नहीं किया जा सका है। अफसरों ने सभी नर्सिग होमों को पांच दिन के अंदर व्यवस्था दुरुस्त करने की नसीहत दी है। पांच दिन बाद सभी का एक-एककर सत्यापन होगा।

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नगर के नर्सिग होम मरीजों की जान के साथ कुछ भी खिलवाड़ कर रहे हों लेकिन हैलट, उर्सला और कार्डियोलॉजी के आईसीयू व इमरजेंसी सबसे महफूज हैं। यहां दो सीढ़ियों के साथ रैम्प की सुविधा आईसीयू तक है। फायर फाइटिंग के लिए ¨स्टगविशर के साथ वाटर टैंक से पाइप लाइन के सहारे में पानी की सुविधा है। अभी एक महीने पूर्व बाल रोग विभाग की एनआईसीयू में शार्ट सर्किट से लगी आग पर पल भर में काबू पा लिया था वह भी 10 फायर ¨स्टगविशर के सहारे। प्रशिक्षित कर्मचारियों ने बड़ा हादसा होने से बचा लिया था। इसी तरह कार्डियोलॉजी में जगह की कमी के चलते रैम्प के साथ दो सीढ़ियां अंदर की ओर खुलती है। ऑपरेशन थिएटर तक लिफ्ट की सुविधा अंदर से उपलब्ध है।

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