कानपुर : में चल रहे पुस्तक मेले में कवियों ने रचनाओं से समां बांधा।


हमारे दिल के थियेटर में फिल्म की रील लगती हो, उजाला रूह को दे दे चमकती नील लगती हो, सिविल लाइन अगर हो तुम मुङो बर्रा समझ लेना, मैं घंटाघर कसम से तुम तो मोतीझील लगती हो।

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ये पंक्तियां युवा कवि धीरज सिंह चंदन ने पढ़ीं तो पूरा पंडाल तालियों की आवाज से गूंज उठा। मौका था सरयू नारायण बाल विद्यालय में दसवें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में कवि सम्मेलन का। इसमें रविवार को शहर के कवियों ने अपने काव्य पाठ से सबको मोहित कर दिया।‘काले धन पर सरकार ने मारी गहरी चोट, रद्दी बनकर रह गए काले-काले नोट’ पंक्तियां जब संयोजक सुरेश अवस्थी ने सुनाईं तो सबने जोरदार तालियां बजाईं। इससे पहले सभी कवियों ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद लोकेश शुक्ल, दिलीप दुबे, अंसार कंबारी, चांदनी पाण्डेय, शिव कुमार सिंह कुंवर और डॉ. कमल मुसद्दी ने भी अपनी कविताओं से देर रात तक लोगों को आनन्दित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिव कुमार सिंह कुंवर ने की। इस मौके पर अरुण प्रकाश अग्निहोत्री, अनिल खेतान, नीलाम्बर कौशिक, गोपाल खन्ना, मनोज त्रिवेदी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।


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