कानपुर ने भरे ‘जख्म’

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kanpur-hospकानपुर का हैलट हॉस्पिटल। प्रदेश के बड़े सरकारी हॉस्पिटल्स में एक। इस अस्पताल का नाम जहन में आते ही अव्यवस्था, मारपीट, इलाज की दिक्कत, जेआर की गुंडई जैसे सीन आंखों के सामने घूमने लगते हैं। लेकिन संडे को दुर्घटनाग्रस्त हुई इंदौर- पटना एक्सप्रेस के घायलों के जख्मों में जो ‘मरहम’ हैलट हॉस्पिटल ने लगाया उसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। हर तरफ चीख- पुकार मची थी, सैकड़ों घायल हॉस्पिटल पहुंचे। उनके साथ घायलों के परिजन भी बदहवास हालत में यहां आए। घायलों को इलाज और उनके परिजनों को जो सहारा कानपुर में मिला उसने एक बार फिर शहर का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। सिर्फ हैलट ही नहीं बल्कि दुर्घटना के शिकार हुए लोगों के साथ पूरा कानपुर खड़ा रहा। परिजनों को खाने- पीने की चीजों के साथ वो प्यार भी दिया कानपुर ने जिसके लिए जाना जाता है अपना शहर.

– इलाज के बाद हालत में सुधार होने पर स्वस्थ्य होकर लगातार डिस्चार्ज हो रहे घायल, स्वास्थ्य विभाग मुहैया करा रहा फ्री एंबुलेंस

– घायलों की संख्या में लगातार कमी, गंभीर घायलों को केजीएमयू भेजा, इलाज और मदद से खुश घायलों ने कानपुर को कहा शुक्रिया

– हैलट में घायलों और उनके परिजनों के खाने- पीने से लेकर दवाइयों तक की है निशुल्क व्यवस्था, शहर के उद्यमियों और स्वयंसेवी संगठन सक्रिय

KANPUR इंदौर- पटना एक्सप्रेस डी- रेलमेंट में घायल हुए पैसेंजर्स के जख्मों पर हैलट और कानपुर ने जो मरहम लगाया है वह उसे कभी नहीं भूल पाएंगे। ‘जब मौत बिल्कुल निकट थी तब कानपुर ने हमको बचाया.’ बुधवार को हैलट से डिस्चार्ज होने के बाद बैशाली के रहने वाले मो। इस्लाम ने आई नेक्स्ट से बातचीत के दौरान यही शब्द कहे उन्होंने हादसे के बाद शहर मदद के लिए जो जज्बा दिखाया था वह उससे बेहद प्रभावित थे। बुधवार को डिस्चार्ज हुए घायल हैलट के डॉक्टर्स और कानपुराइट्स का बार- बार शुक्रिया अदा कर रहे थे। हैलट में भर्ती 68 घायलों में से अब ज्यादातर की हालत में तेजी से सुधार आ रहा है। इस वजह से बीते तीन दिनों में 25 से ज्यादा मरीज डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। वहीं जिनकी हालत नाजुक है उन्हें केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर रेफर किया जा रहा है।

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kanpur-hos3pये जिंदगी इस शहर के नाम

इंदौर के रहने वाले विक्रम सिंह ने कहा कि कानपुर ने दूसरी जिंदगी दी है। उनकी वाइफ विमला ने बताया कि जब वो संडे को यहां लाए गए थे तब बेहोश थे। समझ में नहीं आ रहा था कि ईश्वर कौन सी परीक्षा ले रहा है? लेकिन अब ठीक हैं। कुछ ऐसा ही पटना के अनुराग, प्रियम्, राजकेश्वर का कहना था। उनका कहना था कि ऐसे समय में कानपुर ने घायलों और उनके परिजनों का साथ दिया जब शायद उनकी सांसों ने भी उनका साथ छोड़ना शुरू कर दिया था.

आईसीयू के लिए डीएम की मदद

बुधवार को डीएम कौशलराज शर्मा ने हैलट पहुंच कर घायलों के इलाज को लेकर हाल चाल लिया। इस दौरान प्रिंसिपल डॉ। नवनीत कुमार, सीएमओ डॉ.आरपी यादव, एसआईसी प्रो। आरसी गुप्ता प्रमुख रुप से मौजूद रहे। आईसीयू में चार बच्चों आकांक्षा, अनिकेत, सेजल और आरोही के इलाज में आ रहे एंटीबायोटिक्स की समस्या पर डीएम ने प्रिंसिपल को 50 हजार रुपए की त्वरित मदद देते हुए एक मेडिकल स्टोर चिन्हित कर उनकी खरीदारी के लिए आदेश दिए। वहीं इंदौर की सेजल की हालत में सुधार नहीं होने पर उसे केजीएमयू ट्रामा सेंटर रेफर किया जा रहा है।

जबड़े में 11 जगह हुई टूट- फूट, केजीएमयू रवाना

रेल हादसे में दो पेशेंट्स बुधवार को केजीएमयू के लिए रवाना हुए। इनके जबड़े में बुरी तरह से चोट लगी हुई है। रेल हादसे में घायल हुए अंबेडकर नगर निवासी राजू के जबड़े में 11 जगह फ्रैक्चर है। बुधवार को उन्हें केजीएमयू रिफर किया गया। वहीं झांसी निवासी लखन सिंह यादव की बेटी ज्योति यादव को भी केजीएमयू में रिफर किया गया। ज्योति के भी जबड़े में फ्रैक्चर था।हैलट में वार्ड 1 में भर्ती मरीजों को वार्ड 2 में शिफ्ट किया गया। वहीं बुधवार को परमाकांत झा, मो। इस्लाम, प्रयाग मण्डल को डिस्चार्ज कर दिया गया। वहीं फूला सिंह के परिजन डिस्चार्ज के बाद उनको ले गए। हैलट में घायलों को समय पर उचित इलाज के साथ उनके तीमारदारों को खाना और दूसरी सुविधाएं मिलती रहें। इसके लिए उनको एक वॉर्ड में रखने का फैसला लिया गया।

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हमने घायलों के इलाज के लिए जो भी अच्छे से अच्छा था किया। हर डॉक्टर, वॉर्ड ब्यॉय 48 घंटे से ज्यादा समय तक लगातार ड्यूटी करता रहा। हमने अपना फर्ज पूरी शिद्दत से निभाया.

डॉ। नवनीत कुमार, प्रिंसिपल, जीएसवीएम

 

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