नोटबंदी के दौर में जानिए जब पहली बार हुआ 16 आना =100 पैसा


coin-story-cover-01_14801नोटबंदी की पूरे देश मे चर्चा है। केंद्र सरकार लोगों की दिक्कतों से निपट रही है, तो देश के बैंक 500-1000 के (अब पुराने) नोटों से। नोटों को चलन से बाहर कर नई करंसी पहली बार नहीं आई। इससे पहले भी ऐसा ही बवाल देश में मचा था जब ‘आना-पाई’ व्यवस्था खत्म कर ‘पैसा’ लाया गया था। बैंक और पोस्ट ऑफिस में भीड़ भी आज जैसी ही थी और विरोध में पोस्ट ऑफिस जलाए गए थे। ये किस्सा आप पढ़ेंगे तो जान लेंगे कि करंसी बदलना सरकारों के लिए कितना मुश्किल भरा काम है। एक आना यानि चार पैसे, एक पैसा=तीन पाई…
 पूर्व नौकरशाह और राज्यसभा के मौजूदा सांसद पवन वर्मा ने अपने एक कॉलम में इस घटना का लिखा था। पहली बार अमेरिका ने 1792 में अपनी करंसी के लिए दाशमिक प्रणाली (करंसी को न्यूनतम मूल्य की सौ इकाइयों में विभाजित करना) अपनाई थी. उसके बाद यह प्रणाली इतनी मशहूर हुई कि ब्रिटेन को छोड़कर यूरोप के सभी देशों ने इसे अपना लिया। भारत में तब एक रुपए में 16 आने (एक आना=चार पैसे, एक पैसा=तीन पाई) प्रणाली प्रचलित थी। इंग्लैंड में क्यूंकि उस समय इसी से मिलती-जुलती मुद्रा प्रणाली थी इसलिए अंग्रेजी शासन के समय इसमें कोई छेड़छाड़ नहीं की गई।
आजादी के तुरंत बाद भारत में मौद्रिक विनिमय को तर्कसंगत बनाने के लिए इस बात की जरूरत महसूस की जाने लगी थी कि रुपए के लिए दशमलव प्रणाली को एक झटके में खत्म किया जा सकता था। इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम 1955 में उठाया गया, जब संसद ने सिक्का ढलाई संशोधन कानून पारित कर दिया।
coin-story-3_1480138508समस्या थी…देश को बताएं कैसे?
नए कानून के पारित होने के बाद भी आना-पाई प्रणाली को खत्म करने में कई दिक्कतें थीं।
पहली-देश को इस बारे में बताएं कैसे?
दूसरी- डाक-तार और रेलवे जैसे विभागों की नई दरें कैसे तय हों।
तीसरी- कारोबारियों को आना-पाई प्रणाली खत्म होने के बाद सामान की मनमानी कीमतें तय करने से कैसे रोका जाए?
रास्ताRBIने निकाला एक चार्ट बनाकर-
RBI ने इन समस्याओं को दूर करने के लिए एक विस्तृत गुणन चार्ट छपवाकर देश के तमाम डाकघरों में उपलब्ध कराए थे ताकि लोग इनके आधार पर मुद्रा विनिमय कर सकें। इन तैयारियों के बाद 1957 में भारत सरकार ने नए सिक्के जारी कर दिए. इन पर ‘नए पैसे’ लिखा गया था।
नए सिक्कों के बाजार में आने के साथ ही देश में कई दिलचस्प घटनाएं भी देखने मिलीं।
– कलकत्ता (तब) में कई लोगों ने नए सिक्कों के विरोध में कुछ पोस्ट ऑफिसों में आग लगा दी थी। इन लोगों का कहना था कि सरकार उन्हें महंगी कीमत पर पोस्टकार्ड और लिफाफे दे रही है।
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