Reality check : रैन बसेरे में लटक रहे ताले, ठंड में ठिठुर रहा गरीब


कानपुर.सर्दी ने अपनी दस्तक दे दी है। दिसंबर महीने के दूसरे दिन भी कोहरे का कहर जारी रहा। ऐसे में dainikbhaskar.com की टीम ने शहर के कई रैन बसेरा का रियल्टी चेक किया, जिसमें गरीबों के लिए बनाए गए इन बसेरों की पोल खुलती नजर आई।
न जाने कबसे लगे हैं रैन बसेरे में ताले…
 parmat-rain-basera– यहां के परमट रैन बसेरा में मौजूद रैन बसेरा में ताला लगा हुआ दिखाई।
– आसपास रहने वालों ने बताया कि यह रैन बसेरा पिछले 2 महीने से बंद है। वहीं गार्ड राजू से बात की तो उसने बताया, अभी अधिकारियों ने इसे खोलने से मना किया है।
– स्थानीय निवासी रोहित के मुताबिक, ठंड और कोहरे की शुरुआत हो गई है, लेकिन यह बसेरा हमेशा बंद ही रहता है।
– वहीं सुनीता ने बताया कि यह कभी नहीं खुलता है। यदि कभी खुल भी गया जाए तो यहां सहारा लेने आने वालों को भगा दिया जाता है।
गरीब ठंड में ठिठुर रहा, अस्पतालों के ड्राईवर काट रहे मौज
– दूसरी तरफ उर्सला अस्पताल के कैंपस में बने रैन बसेरा में भी सदरी को लेकर कोई तैयारी नहीं दिखी।
– लाइट की व्यवस्था न होना और गंदगी की वजह से कोई भी वहां नजर नहीं आता है।
– जबकि डफरिन अस्पताल में बने रेन बसेरा में 102 और 108 एम्बुलेंस के चालक अपना कब्जा करे हुए मिले।
– एम्बुलेंस ड्राइवरों ने बताया, यहां की सीएमएस ने उन्हें ठहराया हुआ है।
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– कुछ ऐसा ही हाल स्टेशन के पास सुतरखाना रैन बसेरा का था।
– वहां न ही गार्ड था और न ही कोई कर्मचारी, पूरा रैन बसेरा खली पड़ा हुआ था। उसमें रजाई और गद्दा तो दूर, वहां इतनी बदबू थी कि खड़े होना भी मुश्किल था।
– एक्सप्रेस रोड के रैन बसेरा में छत तो थी, लेकिन दीवारे खुली हुई थी। वहां सोना तो दूर, बैठने का भी कोई इंतजाम नहीं दिखा।
– लोगों के मुताबिक, हीटर में सोने वाले अधिकारियों के लिए अभी सर्दी कहा आई है। उनके लिए ठण्ड तो तब पड़ती है, जब बर्फबारी होती है।

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कुछ रैन बसेरों में छत तो है, लेकिन रजाई-गद्दा नदारद।

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रैन बसेरा पर एम्बुलेंस ड्राइवरों ने किया कब्जा ।

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