कानपुर में बना छोटा डोर्नियर कराएगा छोटे शहरों का सफर

halशनिवार का दिन कानपुर के लिए ऐतिहासिक रहा। कानपुर स्थित हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) देश का इकलौता संस्थान बन गया है जो सबसे छोटे यात्री हवाई जहाज बनाएगा। अभी तक सेना के काम आने वाले डोर्नियर 228 के सिविल संस्करण की नींव एचएएल में पड़ गई। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री जयंत सिन्हा, भाजपा सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी और साध्वी निरंजन ज्योति के साथ एचएएल के सीएमडी टी. स्वर्ण राजू, सीईओ राजीव कुमार और जनरल मैनेजर एमएम तापसे सहित वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में एचएएल कानपुर इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना। इसी के साथ देश में रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम की अवधारणा ने भी मूर्त रूप लेना शुरु कर दिया है। डोर्नियर 19 सीटर छोटे विमान बनने से छोटे शहरों के बीच एयर कनेक्टिविटी का रास्ता साफ हो गया है। एचएएल पहला सिविल डोर्नियर अप्रैल 2017 में सौंप देगा। इस सिविल विमान की लागत महज 50 करोड़ रुपए आएगी। इससे ईंधन की बचत जबर्दस्त होगी, जिसका सीधा असर टिकट पर पड़ेगा। राष्ट्रीय उड्डयन नीति-2016 में छोटे शहरों के बीच सस्ती और सुरक्षित हवाई सेवा का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने का जिम्मा एचएएल कानपुर को मिला है। नौसेना, वायुसेना, भारतीय तटरक्षक दल, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन दल को डोर्नियर-228 की आपूर्ति कर रहा एचएएल हवाईसेवा के लिए डोर्नियर तैयार करेगा। एचएएल कानपुर को इतनी बड़ी जिम्मेदारी उसकी तकनीकी क्षमता को देखते हुए दी गई है। एचएएल इससे पहले 44 सीटर एवेरो बना चुका है। इसके बाद डोर्नियर बनाया जा रहा है। तीस साल में एचएएल सेना को 130 से ज्यादा डीओ-228 की आपूर्ति कर चुका है। इस साल मारीशस और सेशेल्स को भी डोर्नियर निर्यात किए गए हैं। हाल में चेन्नई में आई बाढ़ में सात डोर्नियर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। एचएएल कानपुर ने पांच को ठीक कर दोबारा उड़ान योग्य बनाने का कारनामा कर दिखाया। जयंत सिन्हा ने इस उपलब्धि के लिए एचएएल की टीम को बधाई दी तो पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा। donier

एचएएल में शनिवार को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री जयंत सिन्हा, सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी और केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति की मौजूदगी में डोर्नियर 228 के सिविल मॉडल के स्ट्रक्चर की शुरुआत की गई। फोटो: रोहित त्रिवेदी

19-सीटर हवाई जहाज भरेंगे छोटे शहरों के बीच उड़ान

’ 75 साल से लगातार एयरक्राफ्ट बना रहे हैं वैज्ञानिक’1949 में 20 लाख पूंजी, आज 17 हजार करोड़ ’ मेक इन इंडिया सफल, 17 अपनी पेटेंट डिजायनें ’ 30 हजार कुल कर्मचारी और 10 शोध-विकास संस्थान ’ 44 सीटर एवेरो, फिर 19 सीटर डोर्नियर अब एडवांस लाइट हेलीकाप्टर भी’ दुनिया का इकलौता संस्थान जो जहाज बनाने के साथ सर्विस भी करता है’ विमान बनाने में पूरी दुनिया में एचएएल कानपुर का 36वां स्थान है

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