कानपुर के इस लाल की ऑटोमेटिक गन कैसे करती है कमाल

demo_1482313148गुदड़ी के लाल ने छोटी सी उम्र में यह साबित कर दिखाया कि उसकी सोच कितनी बड़ी है। देश के जवानों की सुरक्षा का जज्बा रखने वाला यह लड़का एक ऐसी राह पर निकल पड़ा जहां उसके सामने अनेक कठिनाईयां थी। इसके बावजूद उसने कभी घुटने नहीं टेके। वह निरंतर आगे बढ़ता रहा। इसी बलबूते उसने इतना बड़ा अविष्कार किया है, जो अब देश के जवानों के काम आएगा।
कानपुर में सचेंडी नगर निवासी विमल कुमार गौतम(21) ने रिमोट से चलने वाली एक ऐसी मशीन तैयार की है, जिसकी मदद से बंदूक को ऑटोमेटिक ऑपरेट किया जा सकता है। इस खोज के संबंध में विमल का कहना है, बॉर्डर पर शहीद होने वालों फौजी भाइयों की जान की सुरक्षा के लिहाज से यह मशीन तैयार की गई है। इसकी मदद से सेना के जवान दूर बैठे ऑटोमेटिक गन चला सकते हैं।

खासबात ये है कि विमल ने घर में पड़े कबाड़ से यह अविष्कार किया है। इस मशीन को तैयार करने में कुल तीन महीने का वक्त लगा। धन के अभाव में मशीन में कैमरा जैसे महंगे उपकरण इत्यादि नहीं लगाए जा सके। उनका कहना है, यदि इस अविष्कार में उन्हें आर्थिक मदद मिलती है तो वे इसे और बेहतर बना सकते हैं।
विमल के परिवार में मां मायादेवी और बड़े भाई सुनिल गौतम व नील कमल गौतम हैं। जबकि पिता श्रवण कुमार गौतम का सात साल पहले देहांत हो चुका है। पिता के जाने के बाद घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। इसके चलते विमल अपनी पढ़ाई आगे जारी नहीं रख पाए। विमल बीए पास कर चुके हैं। वह फटी-पुरानी किताबों को बाइंडिंग कर अपना जेब खर्च चलाते हैं। इसके अलावा खाली समय में वह नए-नए अविष्कार करने में जुटे रहते हैं।

विमल बताते हैं उनका सपना फौज में भर्ती होने का था। लेकिन मां को घबराहट होती थी कि उनका बच्चा कहीं बार्डर पर शहीद न हो जाए। इसलिए उनका यह सपना अधूरा रह गया। भले ही सपना साकार न हो सका हो, लेकिन देश सेवा का जब्जा उनके दिल में अब भी कायम है।

उनके जैसे कई ऐसे हैं जो फौज में शामिल तो होना चाहते हैं लेकिन परिवार के मना करने पर रह जाते है, विमल उनके लिए आदर्श बन गए हैं। वहीं हजारों मां के लाल देश सेवा में सरहद पर शहीद हो जाते हैं, इसलिए विमल अपने फौजी भाइयों की सुरक्षा के लिए आगे आए हैं।

वे कहते हैं हमारे फौजी हमारे लिए सीमा पर लड़ते हुए जान दे देते हैं। हमें उनकी जान की कीमत अदा करनी चाहिए। हमें भी उनके लिए सोचने की जरूरत है। यही सोचकर उन्होंने यह अविष्कार किया। इसे अत्याधुनिक बनाने के लिए उन्हें केवल सरकार की मदद की जरूरत है।

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