इस बुजुर्ग ने किया ऐसा काम, जाति-धर्म का जहर घोलने वालों के लिए बना सबक


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बिजली, कब्रिस्तान, श्मशान और कसाब में उलझाने वाले नेताओं के लिए अनोखी मिसाल।

कानपुर. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के दौरान नेता वोटर्स से वोट पाने के लिए जाति-धर्म का जहर घोलकर दंगल फतह करने में लगे हैं। बिजली, कब्रिस्तान, श्मशान, कसाब के जरिए मतों के ध्रुवीकरण का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन कानपुर में एक बुजुर्ग मुस्लिम ने गंगा-जमुनी तहजीब की अनोखी मिशाल पेश की है। रावतपुर निवासी मोहम्मद शफीक ने सिद्वेश्वर मंदिर में विधि-विधान से 5 हिन्दू युवक-युवतियों के विवाह के साथ ही इतने ही मुस्लिम जोड़ों का खुद के पैसे से निकाह संपन्न कराया। शफीक ने कहा कि सियासतदान क्या बोलते हैं और क्या करते हैं हमें उनकी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि देश में अमन-चैन रहे इसके लिए प्रयास करते रहना चाहिए। शफीक के मुताबिक वह दो बार हज जा चुके हैं और वहां शपथ ली थी कि अब अपनी कमाई का सारा पैसा गरीब हिन्दू और मुस्लिम युवतियों की शादी में खर्च कर देंगे।
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मंदिर में एकत्र हुए सभी वर्ग के लोग
मोहम्मद शफीक के इस काम में रावतपुर के पांच हजार से ज्यादा लोगों ने भाग लिया। यहां न कोई हिन्दू और न कोई मुस्लिम था। सभी लोग खुश थे और मंदिर से जब बारात उठी तो गानों की धुन में लोग जमकर नाचे। समाजसेवी राजेंद्र खरे के मुताबिक उन्हें विवाह कार्यक्रम के बारे में जानकारी मिली तो बिना बुलावे के पत्नी समेत आ गए और शफीक भाई की अनोखी शादी में शामिल हुए। काकादेव के जाने माने डॉक्टर रमेश झा ने भी शादी में शिरकत की। डॉक्टर रमेश ने बताया कि शफीक ने अपनी जिन्दगी की सारी कमाई गरीब युवतियों की शादी में खर्च कर एक नई मिशाल पेश की है। जहां आज नेता लोगों को बाटने का काम कर रहे हैं, वहीं शफीक जैसे कुछ लोग जोड़ने के लिए लगे हैं।
वीडियो देखें-
युवकों के पिता बनकर की अगुवाई
सिर पर टोपी और गले में अंगौछा डाले मोहम्मद शफीक ने हिन्दू और मुस्लिम युवकों के पिता बनकर बारात की आगुवाई की। बारात मंदिर से निकली और चौराहे तक गई। इस दौरान शफीक जमकर नाचे और गरीबों को पैसे दिए। शफीक ने जहां हिन्दू युवकों के पिता की सारी रस्में अदा कीं, वहीं मुस्लिम युवकों के सिर पर सेहरा बांधा। विवाह समारोह में गरीब घर की बेटियां थीं, जिनके सिर पर माता-पिता का साया नहीं था। समारोह में इरन खातून के माता-पिता का इंतकाल हो चुका है। इसी तरह रावतपुर निवासी आरती बाथम की मां का देहांत हो चुका है। समारोह में सोनी, लक्ष्मी, रोशनी, सुनैना, सविता, शहनाज बानो, तरन्नुम, जरीन, नजरीन ने साथ जीने मरने की कसमें खाईं।
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अगली बार बीस युवतियों का कराएंगे विवाह
मोहम्मद शफीक ने बताया कि वह जब तीसरी बार हज जाएंगे तो 20 गरीब हिन्दू और मुस्लिम समुदाय की युवतियों की शादी कराएंगे। शफीक ने विवाह समारोह संपन्न होने के बाद हर जोड़े को पैसे के साथ गृहस्थी का सारा समान देकर विदा किया। शफीक ने बताया कि हम मुशायरे में भाग लेते हैं और जो कमाते हैं वह गरीब लोगों की मदद में खर्च कर देते हैं। शफीक ने बताया कि इस जमीन पर जब इंसान आता है तो न तो वह हिन्दू और न ही मुस्लिम सिर्फ इंसान होता है। हमें अपने ही जाति-धर्म में बाटते हैं। हम देश के सियासतदानों से गुजारिश करते हैं कि वह विकास के नाम पर चुनाव लड़ें। हम यहीं पैदा हुए हैं और यहीं पर सुपुर्देखाक होंगे।
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