अब कानपुर शताब्दी में सफर होगा यादगार, मिलेंगी ये सुविधाएं


संक्षेप:

  • कानपुर से दिल्ली का सफर होगा खास
  • मिलेंगी हवाई जहाज जैसी सुविधाएं
  • डीआरएम एसके पंकज ने अत्याधुनिक कोचों का किया लोकार्पण

कानपुर: कानपुर शताब्दी  से दिल्ली सफर करने वालों के लिए खास होगा। कानपुर शताब्दी के आलीशान सफर की शुरुआत होगी। इसमें हवाई जहाज जैसी सुविधाएं मुहैया कराने का दावा किया जा रहा है। रविवार को एनसीआर के जीएम एमसी चौहान, डीआरएम एसके पंकज ने अत्याधुनिक कोचों का लोकार्पण किया।

कैरिज एंड वैगन विभाग के कर्मचारी एक महीने से जुटे थे। ट्रेन के सभी कोच मे भीतर धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के चित्र लगे हैं। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का नजारा भी देखने को मिलेगा। सोमवार से नए कोचों वाली ट्रेन दिल्ली को रवाना होगी।

रविवार को न्यू कोचिंग कॉम्प्लेक्स में जीएम ने कोच देखे और कम समय में सभी कोचों का चेहरा बदलने के लिए विभागीय कर्मचारियों को बधाई दी। रेलवे ने अक्तूबर में स्वर्ण प्रोजेक्ट के तहत देश की 16 ट्रेनों को आधुनिक सुविधा वाली बनाने का फैसला लिया था। इसके तहत एनसीआर जोन की कानपुर शताब्दी भी शामिल थी। रेलवे ने आधुनिक सुविधाओं के नाम पर किराया नहीं बढ़ाने का फैसला लिया है। सेंट्रल के डायरेक्टर जितेंद्र कुमार, एसएस आरएनपी त्रिवेदी, आरपीएफ प्रभारी राजीव वर्मा, कोच कॉम्प्लेक्स के नरेश यादव आदि मौजूद रहे।

नए वर्ष की पूर्व संध्या पर कानपुर सेंट्रल को दो तोहफे मिले। लंबे समय से कोचिंग कॉम्प्लेक्स में खड़ी ब्रिटिशकालीन 138 साल पुरानी हैंड क्रेन की मरम्मत करके उसे न्यू कोचिंग कॉम्प्लेक्स के गेट पर खड़ा कर दिया। रविवार को एनसीआर के जीएम एमसी चौहान ने इस धरोहर को चलवा कर देखा। खास बात यह है कि क्रेन 1879 में इंग्लैंड की कंपनी ने सप्लाई किया था और बाद में रेलवे ने इसे बेड़े में शामिल हो गई थी। यह क्रेन तब कानपुर आई थी जब ब्रिटिश इंडिया कंपनी की रेल अनवरगंज से कन्नौज को चलती थी। तब अनवरगंज को पलटइया स्टेशन के नाम से जाना जाता था।

ट्रेनों से आने वाले माल को उतारने और ट्रेन डिरेलमेंट होने पर यही क्रेन इस्तेमाल होती थी। एनसीआर की सबसे पुरानी इस क्रेन के पहिए बदल दिए गए। हाथ से घुमाने के साथ ही हाईडोल्कि सिस्टम लगा दिया गया। सेंट्रल स्टेशन के डायरेक्टर जितेंद्र कुमार ने बताया कि वर्ष 1879 में यह क्रेन कानपुर आई थी। तब इस क्रेन को यहीं से भेजा जाता था क्योंकि पहले से ही कानपुर जंक्शन था। तब देश में केवल चार जंक्शन होते थे। हैंड क्रेन की क्षमता अभी भी आधुनिक क्रेन के बराबर है। दस टन लोड उठाने वाली क्रेन का इस्तेमाल आपात स्थिति में होगा। इसे ब्राड गेज ट्रैक के हिसाब से तैयार कर लिया गया।

एनसीआर जीएम एमसी चौहान ने कहा कि नए साल के फरवरी से हमसफर ट्रेन इलाहाबाद से आनंदविहार टर्मिनल चलाई जाएगी। इस ट्रेन का कानपुर सेंट्रल पर ठहराव के साथ ही सीटें भी रिजर्व रहेंगी। इस नई ट्रेन का शहरी भी पूरा लाभ उठाएंगे। यह इलाहाबाद दूरंतो के समय पर इलाहाबाद और कानपुर से छूटेगी।

डीआरएम एसके पंकज ने जर्जर क्वार्टरों के बारे में बताया कि कानपुर में जितने भी जर्जर क्वार्टर है, उतने सभी ध्वस्त होंगे। चरणवार इनको गिराने का काम शुरू हो गया है। मार्च-2018 तक 600 क्वार्टर नए बना कर्मचारियों को दिए जाएंगे।

डायरेक्टर ने बताया कि 15 जनवरी से लखनऊ शताब्दी एक्सप्रेस का संचालन सात के बजाय नौ नंबर प्लेटफॉर्म से किया जाएगा। इसके लिए नौ को सजाया और संवारा जा रहा है। इसके बाद इसका संचालन शुरू हो जाएगा। इसके बाद यात्री सिटी साइड से सीधे आकर ट्रेन में चढ़ सकेंगे।

एमसी चौहान ने दावा किया है कि कानपुर से चलने वाली श्रमशक्ति सहित जितनी एक दर्जन एक्सप्रेस ट्रेनें हैं, इन सभी में ढाई साल में एलएचबी कोच लगा दिए जाएंगे। ऐसे कोच का उत्पादन हर साल तीन हजार कोचों का रखा गया है।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.