प्राचीन सभ्यताओं और अजब-गजब मंदिरों के लिए जाना जाता है ऐतिहासिक महानगर का ये इलाका


देश के ऐतिहासिक महानगरों में शामिल कानपुर का घाटमपुर इलाका प्राचीन सभ्यताओं और अजब-गजब मंदिरों के लिए जाना जाता है। यहां चंदेल वंशीय राजाओें द्वारा बनवाया गया लाखौरी ईटों का शिव मंदिर भी है। सबसे ज्यादा आकर्षक का केंद्र मानसूनी पत्थरों से बना जगन्नाथ मंदिर है।
तो आइये जानते हैं घाटमपुर और भीतरगांव के कुछ ऐतिहासिक मंदिरों के बारे में…

गुप्तकालीन मंदिर भीतरगांव :

कानपुर घाटमपुर तहसील क्षेत्र में कसबा भीतरगांव में सातवीं सदी में बनवाया गया गुप्तकालीन मंदिर इतिहास में दर्ज है। ईंटों से निर्मित इस मंदिर की खोज का श्रेय अंग्रेज पर्यटक कानिंघम को दिया जाता है। मंदिर के गर्भग्रह में कोई मूर्ति नहीं है। जबकि, ईंटों से निर्मित दीवारों पर पशु-पक्षियों और मनुष्यों की मैथुनरत प्रतिमाएं (खजुराहो) की तर्ज पर खंडित अवस्था में हैं। मंदिर में बने फलकों की कलाकृति दर्शनीय है।

मानसून का पूर्व संकेत देता है मंदिर:

 

भीतरगांव कसबे से घाटमपुर की ओर चलने पर बेंहटा-बुजुर्ग गांव में जगन्नाथ जी का भव्य और प्राचीन मंदिर है। पुरी (उड़ीसा) की तर्ज पर निर्मित मंदिर के मुख्य गुबंद की छत पर लगे मानसूनी पत्थर की विशेषता है कि बारिश के दिनों में मानसून सक्रिय होने से एक सप्ताह पहले ही पत्थर से पानी की बूंदें टपकनी शुरू हो जाती हैं। पत्थर से पानी की बूंदें गिरने का रहस्य वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए हैं।

चंदेल वंशीय राजाओं ने बनवाया मंदिर:

 

मुगल रोड के किनारे बसे निबियाखेड़ा गांव में लाखौरी ईंटों से बना भद्रेश्वर महादेव का भव्य मंदिर है। कलात्मक लाखौरी ईंटों से बने मंदिर का निर्माण चंदेल वंशीय राजाओं द्वारा कराया जाना बताया जाता है। मंदिर की कलाकारी देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। मंदिर के केयर टेकर रामनरेश ने बताया कि यहां पर शिवरात्रि और सावन के सोमवारों पर दूर-दूर से लोग दर्शन-पूजन करने आते हैं

यह धरोहरें भी दर्शनीय:

 

प्रमुख मंदिरों के साथ ही कानपुर के घाटमपुर में हमीरपुर रोड के किनारे स्थित पिसनहरी बुढ़िया का मंदिर, बीहूपुर गांव में स्थित देवी फूलमती का मंदिर, परौली और कोरथा गांवों में स्थित प्राचीन शिव मंदिर और रिंद नदी के किनारे बसे करचुलीपुर गांव के औलियाश्वर महादेव का मंदिर भी दर्शनीय हैं और सभी पुरातत्व के अधीन हैं।

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