मूलगंज : बाबू जी क्या क्या खरीदोगे !


मूलगंज : बाबू जी क्या क्या खरीदोगे !
सुबह ‘दिहाड़ी मजदूर मण्डी” दिन भर बाजार आबाद

            कानपुर शहर का ‘मूलगंज” ! जी हां, यह इलाका मूलगंज अपने खास अंदाज के लिए शहर क्या आसपास के इलाकों में खासा पहचाना जाता है। ‘मूलगंज” का नाम आते ही किसी के चेहरे पर मुस्कान नाच उठती है तो वहीं खास-ओ-आम के बाजार का अक्स उभरता है।

‘मूूलगंज” अपने आप में एक समग्र बाजार। दिहाड़ी मजदूर चाहिए या र्इंजन चाहिए या फिर कपड़े-लत्ते नये-पुराने कुछ भी या फिर जिस्म की भूख मिटानी हो। हर जरुरत पूरी करे सिर्फ ‘मूलगंज”। हालांकि ‘मूलगंज” की चारों दिशाओं में अलग-अलग मुख्य मार्ग-अलग-अलग मुख्य मार्केट। फिर भी समग्रता में चौतरफा इलाका मूलगंज ही माना जाता है। ‘मूलगंज” चौराहा से पूूरब की ओर मेस्टन रोड, पश्चिम में लाटूश रोड, उत्तर में नई सड़क आैर दक्षिण में हालसी रोड का इलाका आता है।
‘मूलगंज” चौराहा पर सुबह ‘दिहाडी मजदूर मण्डी” आबाद होती है तो वहीं दिन भर से रात तक व्यापारिक चहल-पहल रहती है। ‘दिहाड़ी मजदूर मण्डी” में शायद ही कोई ऐसा किस्म हो जिसका मजदूर न मिले। मूलगंज चौराहा-चौक ने भी शहर का इतिहास देखा। स्वाधीनता आंदोलन में क्रांतिकारियों के तेवर देखे तो वहीं देश में लोकसभा से लेकर राष्ट्रपति तक चुनाव लड़ने वाले भगवती प्रसाद दीक्षित ‘घोड़े वाला” की जनसभायें भी देखीं। ‘घोड़े वाला” की जनसभाओं में चौक-चौराहा खचाखच भरा रहता था। कहीं पैर रखने की जगह नहीं होती थी।
          अब तो इस इलाके में शहर का सबसे बड़ा जूता-चप्पल मार्केट सज गया।  फिर भी ‘बाबूजी” धीरे चलना जरा संभलना बड़े धोखे हैं इस राह में…. जी हां, मूलगंज ‘नगर बधुओं” का इलाका भी है। ‘नगर बधुओं” से मुलाकात-मुस्कान किसी के चेहरे को खिला देती है तो किसी को बर्बाद भी कर देती है। ‘मूलगंज” के इस हसीन बाजार को ‘रोटी वाली गली” व ‘नील वाली गली” के नाम से जाना जाता है। हालांकि ‘नगर बधुओं” को प्रशासन के तेवर देख कर मूलगंज का यह इलाका छोड़ना पड़ा। फिर भी ‘नगर बधुओं” की रौनक से इलाका आबाद रहता है। मूलगंज का लाटूश रोड इलाका मशीनरी उद्योग-कारोबार का क्षेत्र है।
            चाहे सिलाई मशीन की खरीद करनी हो या डीजल र्इंजन-पम्प चाहिए। खराद से लेकर छोटे-बड़े मशीनरी पुर्जे भी इस बाजार में उपलब्ध होते हैं। मूलगंज-मेस्टन रोड इलाके के बाजारों के घर गृहस्थी का छोटा से बड़ा हर सामान उपलब्ध रहता है। चाहे बिजली का सामान खरीदना हो या फिर कपड़े-लत्ते की खरीदारी करनी हो। खास यह कि मूलगंज का दिल शहर के लिए धड़कता है तो वहीं शहर का दिल भी मूलगंज के लिए धड़कता है। मूलगंज में देशी घी के स्वादिष्ट व्यंजन उपलब्ध होते हैं तो वहीं खोया बाजार भी स्वाद को बढ़ाता है। मूलगंज के खोया-मावा की ख्याति दूर-दूर तक है। आसपास के व्यापारी इसी बाजार में दुग्ध उत्पाद बेंचने आते हैं। वहीं मूलगंज का नई सड़क इलाका ‘दबंगों” के नाम हमेशा से रहा।

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