इस बुजुर्ग ने किया ऐसा काम, जाति-धर्म का जहर घोलने वालों के लिए बना सबक

बिजली, कब्रिस्तान, श्मशान और कसाब में उलझाने वाले नेताओं के लिए अनोखी मिसाल। कानपुर. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के दौरान नेता वोटर्स से वोट पाने के लिए जाति-धर्म का जहर घोलकर दंगल फतह करने में लगे हैं। बिजली, कब्रिस्तान, श्मशान, कसाब के जरिए मतों के ध्रुवीकरण का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन कानपुर में…

कम्प्यूटरीकृत वोटर लिस्ट बनाने वाला इकलौता जिला बना कानपुर

स्नातक एवं शिक्षक विधायक चुनाव के लिये कम्प्यूटरीकृत वोटर लिस्ट बनाने के मामले में महानगर कानपुर सूबे का इकलौता जिला बन गया है। जिला प्रशासन ने निजी प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल की है। न तो भारत निर्वाचन आयोग और न ही उत्तरप्रदेश निर्वाचन कार्यालय ने इसके लिये कोई साफ्टवेयर दिया था, न ही कोई…

जिंदगी का आखिरी पड़ाव, जगा रहे ज्ञान की अलख

वह जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर हैं लेकिन ज्ञान की अलख जगाने में पूरी तल्लीनता के साथ जुटे हैं। प्रतिदिन प्राथमिक स्कूल के बच्चों को तीन घंटे तक शिक्षा देने के साथ जीवन में आगे बढ़ने के गुर सिखाते हैं। एकल विद्यालयों की सूची बना रखी है। अलग-अलग स्कूल में पूरा समय देते हैं। प्राथमिक…

कानपुर के इस लाल की ऑटोमेटिक गन कैसे करती है कमाल

गुदड़ी के लाल ने छोटी सी उम्र में यह साबित कर दिखाया कि उसकी सोच कितनी बड़ी है। देश के जवानों की सुरक्षा का जज्बा रखने वाला यह लड़का एक ऐसी राह पर निकल पड़ा जहां उसके सामने अनेक कठिनाईयां थी। इसके बावजूद उसने कभी घुटने नहीं टेके। वह निरंतर आगे बढ़ता रहा। इसी बलबूते उसने इतना बड़ा अविष्कार…

कानपुर में एक ऐसा शख्स है, जिसके पास 786 नंबर का अनोखा कलेक्शन है।

कानपुर.यूपी के कानपुर में एक ऐसा शख्स है, जिसे 786 नंबर का ऐसा शौक चढ़ा कि उसने 1 रुपए से लेकर 1000 के नोटों के 82 हजार रुपए का कलेक्शन बनाया है। इसके साथ ही उसके बैंक अकाउंट से लेकर उसके पासपोर्ट में भी 786 का नंबर है।  जानिए क्यों है ऐसा अनोखा शौक…  …

सैर सपाटे को निकले, दहशत में लौटे

सियालदह अजमेर एक्सप्रेस के पीड़ितों ने सुनाई आपबीती भगवान की कृपा और ख्वाजा के करम से बचे कानपुर: कोई परिवार सैर-सपाटे के लिए निकला था तो कोई कामकाज के सिलसिले में। अलग-अलग मंजिल तक जाने के सफर के बीच ही आए हादसे के स्टेशन ने दिलों को दहशत से भर दिया। मौत के जबड़े से…

पत्नी से ज्यादा गहने पहनता है ये शख्स

कानपुर.कुछ शौक ऐसे होते है जो खुद ब खुद लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं। यूपी के कानपुर में रहने वाले मनोज सेंगर को सोने-चांदी के आभूषण पहनने का शौक है। वो भी ऐसा कि जो इन्हें देखता है वो देखता ही रह जाता है। इन्‍हें कानपुर का बप्‍पी लहरी भी कहते हैं। अब इस शौक की वजह से इनको धमकियां मिलनी भी शुरू हो गई हैं।

कानपुर में एसिड अटैक पीड़िता से पड़ोस के युवक ने की शादी

करीब 12 साल पहले उसके चेहरे पर एसिड फेंका गया था। लोगों की मदद से उसके चेहरे के 8 ऑपरेशन हुए। जिस्म को मिले गहरे जख्म तो भर गए, लेकिन दिल छलनी था। गुरुवार का दिन उस बहादुर शबीना के लिए नई सुबह लेकर आया, जब उसका निकाह मोहम्मद शमशाद से हुआ। मियां-बीवी खुश हैं। उन्होंने अपनी सुखी जिंदगी के सपने पाले हैं।

श्रुति बनीं गोल्डन गर्ल मेडलों से भरी झोली

नाम- श्रुति मिश्रपिता- सुचित मोहन मिश्रमम्मी- सुमन मिश्र शिक्षा- हाईस्कूल- डीडीएसबी, आजाद नगर (67})इंटरमीडिएट- सनातन धर्म इंटर कॉलेज, कौशलपुरी (78}) स्नातक- डीजी कॉलेज (78.89})

11 दिसम्बर को पैगम्बरे इस्लाम के जन्म दिवस पर जश्ने चिरागां मनाएंगे

बारावफात जुलूस के दिन रूट की सभी शराब दुकानें बंद रहेंगी। परेड में अंदर-बाहर के बाजार भी तीन दिन नहीं लगने दिये जायेंगे और सुअरबाड़े भी बंद रहेंगे। जुलूस के दिन बिजली की निर्बाध आपूत्तर्ि होगी और फाल्ट ठीक करने के लिये विशेष इंतजाम होंगे।

नौकरी छोड़कर मूक बधिर बच्चों की प्रतिभा निखारने में जुटीं मनप्रीत कौर

मनप्रीत कौर ने बताया एक दिन शाम को कंपनी से बाहर घर जाने को निकली तो ठेलिया दुकानदार ने उनसे भी बच्चों को पढ़ाने को कहा। छोटे-छोटे गरीब बच्चों को देख उन्हें दया आ गई और वह पढ़ाने के लिये रुक गईं। इन्हीं बच्चों में दो मूक बधिर बच्चे भी थे। इन्हीं दो बच्चों ने उनके दिल को ऐसा छुआ कि उन्होंने कानपुर आकर ऐसे बच्चों को शिक्षित करने और उन्हें निखारने का फैसला ले लिया। और नौकरी छोड़कर कानपुर आ गईं। संतनगर चौराहे पर ससुराल में ही इन बच्चों के लिए तीन कमरे सुरक्षित किए और कक्षा 9,10, 11 व 12 के मूक बधिर बच्चों को मुफ्त कोचिंग देने लगीं और उन्हें सिलाई कढ़ाई, कंप्यूटर आदि की शिक्षा देकर उनकी प्रतिभा को निखारती हैं और वर्तमान में 42 छात्र-छात्रएं हैं

तलाशे और तराशे ‘नगीनों’ से भरा कला का सागर

तलाशे और तराशे ‘नगीनों’ से भरा कला का सागर

कानपुर : उन बच्चों को झुग्गी झोपड़ी से निकालकर मुख्य धारा से जोड़ना आसान नहीं था जिनके माता पिता का पूरा दिन दो वक्त की रोटी के जुगाड़ में निकल जाता है। आज इनमें से कई बच्चे स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने के साथ-साथ चित्रकला, पेंटिंग व संगीत जैसी विधाओं में पारंगत हो रहे हैं। डीएवी डिग्री कालेज की प्रोफेसर डा. पूर्णिमा तिवारी ने इन ‘नगीनों’ को तलाशा और तराशा।