120 साल पुराना है ‘टर्र’ का मेला


ईद के दूसरे दिन मंगलवार को भी लोग एक दूसरे के घर गए और ईद की मुबारकबाद दी। चमनगंज में ‘टर्र’ का मेला लगा जहां बच्चों और बड़ों ने खूब एन्ज्वॉय किया। मिट्टी के खिलौने हमेशा की तरह आकर्षण का केंद्र रहे। बच्चों ने खूब झूला झूला। इस मौके की खास डिश ‘लुचई’ भी खूब…

विदेशों में कार दौड़ा रहे साढ़े सात हजार कनपुरिए


जाम ही कानपुर की पहचान नहीं है बल्कि विदेशों में भी कनपुरिए अपनी धमक कायम किए हुए हैं। एक साल में (1 मई-2016 से 31 मई-2017 तक) 7412 कनपुरियों ने विदेशों में लग्जरी वाहन चलाने के लिए आरटीओ से परमिट लिया है। विदेशों में एक साल के मिलने वाले परमिट में 87 फीसदी चौपहिया वाहन वाले हैं, जबकि बाकी दोपहिया वाहन के हैं। विदेश में वाहन चलाने का परमिट कम से कम और अधिक से अधिक साल भर के लिए दिया जाता है। इसके लिए आवेदक को एक हजार रुपए फीस भी चुकानी पड़ती है।

कानपुर के विकास को पंख लगाएगी रिंग रोड


कानपुर  शहर में 105 किलोमीटर की आउटर रिंग रोड बनाने पर मुहर तो लग गई है पर इसका निर्माण आसान नहीं है। सबसे बड़ा काम जमीन का अधिग्रहण है। इसमें 15 हजार किसानों की 600 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है। केन्द्र सरकार रिंग रोड की लागत में 90 फीसदी धनराशि देने को तैयार है…

जिस कनपुरिए के लिए धडक़ता है प्रीति जिंटा का दिल, उसे अमीषा पटेल ने बोल दिया आई लव यू


कानपुर . किस्मत वाकई शानदार है। देश में करोड़ों लोगों का दिल प्रीति जिंटा और अमीषा पटेल की शोख अदाओं पर धडक़ता है। एक बारगी मिलने और स्पर्श करने का दिल करता है, लेकिन कनपुरिया मिजाज वाला एक ऐसा भी है, जिसकी खूबसूरती पर नामचीन अभिनेत्रियों फिदा हैं। खुलेआम बाहों में समेटने की इच्छा जताकर…

प्लीज! स्कूलों के पास हॉर्न न बजाएं, चिड़चिड़े हो रहे बच्चे


स्कूलों और अस्पतालों के पास कृपया हॉर्न नहीं बजाएं। हॉर्न से लोग सिर्फ बेचैन ही नहीं कर रहे बल्कि कई बीमारियां भी दे रहे हैं। स्कूलों के पास ज्यादा शोर-शराबे से बच्चे चिड़चिड़े हो रहे। ध्वनि प्रदूषण का खतरा युवा पीढ़ी में दिखने लगा है। ये बातें आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र लाल चंदानी…

आजादी के दीवानों की याद में मनाया जाता है हटिया होली मेला


कानपुर : क्रांतिकारियोंकी ये धरती राष्ट्रप्रेम के उसी रंग में आज भी सराबोर है। दुनिया के लिए होली सिर्फ धार्मिक पर्व होगा, लेकिन शायद कानपुर इकलौता ऐसा शहर है, जहां इसे राष्ट्रप्रेम के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। ब्रिटिश हुकूमत की ज्यादती के खिलाफ शुरू हुई परंपरा में हटिया होली मेला (गंगा…

किसके हैं सेंट्रल पर खड़े 1000 वाहन


अत्यंत संवेदनशील और ज्यादातर समय में हाई अलर्ट पर रहने वाले व्यस्ततम सेंट्रल स्टेशन पर एक हजार ऐसी कारें और दोपहिया वाहन खड़े हैं जिनकी जानकारी किसी को नहीं है। किसी को यह भी नहीं पता है कि ये वाहन कब और कौन खड़ा करके चला गया। वह कहां गया। क्या है उसकी पहचान। इनकी…

कानपूर ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल


कानपुर में कई दर्शनीय स्थल हैं। वैसे तो यह शहर औद्योगिक नगर है, किंतु ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल भी यहां हैं। इनमें हैं: नानाराव पार्क (कम्पनी बाग), चिड़ियाघर, राधा-कृष्ण मन्दिर, सनाधर्म मन्दिर, काँच का मन्दिर, श्री हनुमान मन्दिर पनकी, सिद्धनाथ मन्दिर, जाजमऊ आनन्देश्वर मन्दिर परमट, जागेश्वर मन्दिर चिड़ियाघर के पास, सिद्धेश्वर मन्दिर चौबेपुर के पास,…

कानपुर की ‘धनुष’ करेगी बोफोर्सकी जगह सीमा पर निगरानी


सरहद की निगरानी बोफोर्स की जगह ‘धनुष’ तोप के हवाले होगी। कानपुर की ऑर्डिनेंस फैक्टरी में तैयार होने वाली इस स्वदेशी तोप की मारक क्षमता बोफोर्स के मुकाबले 18 किलोमीटर ज्यादा है। कानपुर ऑर्डिनेंस फैक्टरी ने डीआरडीओ संग मिलकर अत्याधुनिक तोप बनाई है। कई मायनों में बेहतर ‘धनुष’ तोप की बैरल रेंज 46 किलोमीटर तक…

कछुआ तालाब में आपका स्वागत है


कानपुर। आमतौर पर घरों में देखा जाता है कि लोग मछली व कछुआ इसलिए पालते है कि सुबह-सुबह इनको देखने पर पूरा दिन शुभ रहता है लेकिन शहर के 364 साल पुराने तालाब में शहंशाह कछुआ को इसलिए देखने के लिए बेताब रहते है कि बिगड़ा हुआ काम कम बन जाता है। हालांकि यह कछुआ…

कानपुर में एक ऐसा शख्स है, जिसके पास 786 नंबर का अनोखा कलेक्शन है।


कानपुर.यूपी के कानपुर में एक ऐसा शख्स है, जिसे 786 नंबर का ऐसा शौक चढ़ा कि उसने 1 रुपए से लेकर 1000 के नोटों के 82 हजार रुपए का कलेक्शन बनाया है। इसके साथ ही उसके बैंक अकाउंट से लेकर उसके पासपोर्ट में भी 786 का नंबर है।  जानिए क्यों है ऐसा अनोखा शौक…  …

कानपुर के गंगा किनारे बने बाबा घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बनाते थे ठंडाई।


कानपुर के गंगा किनारे बने बाबा घाट को शायद ही कोई जानता होगा, लेकिन एक समय था जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने दोस्तों के साथ इस घाट पर घंटो समय गुजारा करते थे। वो यहां दोस्तों के साथ मस्ती करते, गीत गाते और घंटो ठंडाई पीसते थे। आज यह घाट बदहाल…

चलो घूम के आएं, जश्न मनाएं


क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों का आगाज हो चुका है। छुट्टियों पर घूमने-फिरने में खर्च करने वाले भी बोरिया-बिस्तर बांधकर निकल पड़े हैं या निकलने की तैयारी में हैं। खास बात ये है कि नोटबंदी का असर टूरिज्म के बाजार में न के बराबर है। अभी तक विभिन्न ट्रैवल कंपनियों के जरिए नौ हजार…

सेंट्रल स्टेशन से करिए ‘यादों’ का सफर


सेंट्रल स्टेशन पर सौंदर्यीकरण किया जाना है, इस दिशा में कई काम होने हैं। घंटाघर की ओर थीमपार्क बनाया जाएगा। इसकी रूपरेखा तैयार हो चुकी है। जल्द ही यह हकीकत के धरातल पर आ जाएगा।

शहर की यादगार है ‘ऑल सोल्स कैथेडरल’


कानपुर मेमोरियल चर्च जिसे ‘ऑल सोल्स कैथेडरल’ के नाम से जाना जाता है। यह शहर का सबसे पुराना चर्च है। यह करीब 141 वर्ष पुराना है। चर्च वास्तव में उन मसीही लोगों की याद में बनाया गया था जो कानपुर की घेराबन्दी के दौरान मारे गए थे। कैंट में स्थापित यह चर्च आर्किटेक्ट के आधार…

कानपुर में बना छोटा डोर्नियर कराएगा छोटे शहरों का सफर


शनिवार का दिन कानपुर के लिए ऐतिहासिक रहा। कानपुर स्थित हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) देश का इकलौता संस्थान बन गया है जो सबसे छोटे यात्री हवाई जहाज बनाएगा। अभी तक सेना के काम आने वाले डोर्नियर 228 के सिविल संस्करण की नींव एचएएल में पड़ गई। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री जयंत सिन्हा, भाजपा सांसद डॉ.…

मलेशिया व सिंगापुर जैसा होगा कानपुर का तितली पार्क


कानपुर प्राणि उद्यान में मलेशिया और सिंगापुर के तर्ज पर आकर्षक तितली पार्क बनाया जाएगा। शासन कानपुर और लखनऊ प्राणि उद्यान के निदेशक को विदेश भेजने की तैयारी कर रहा है।

5 किलो की चांदी के जूते व डेढ़ किलो की पहनता है चेन, कानपुर का ये गोल्डन मैन


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में रखे कालेधन को बाहर लाने के लिए 500 सौ- 1000 हजार के नोटबंद करने का एेलान भले ही कर दिया हो5 किलो की चांदी के जूते व डेढ़ किलो की पहनता है चेन, कानपुर का ये गोल्डन मैन

कानपुर ने भरे ‘जख्म’


कानपुर का हैलट हॉस्पिटल। प्रदेश के बड़े सरकारी हॉस्पिटल्स में एक। इस अस्पताल का नाम जहन में आते ही अव्यवस्था, मारपीट, इलाज की दिक्कत, जेआर की गुंडई जैसे सीन आंखों के सामने घूमने लगते हैं। लेकिन संडे को दुर्घटनाग्रस्त हुई इंदौर- पटना एक्सप्रेस के घायलों के जख्मों में जो ‘मरहम’ हैलट हॉस्पिटल ने लगाया उसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। हर तरफ चीख- पुकार मची थी, सैकड़ों घायल हॉस्पिटल पहुंचे। उनके साथ घायलों के परिजन भी बदहवास हालत में यहां आए। घायलों को इलाज और उनके परिजनों को जो सहारा कानपुर में मिला उसने एक बार फिर शहर का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है

कानपुर एक परिचय:


Kanpur is the 12th most populous city in India. It is the administrative headquarters of Kanpur Nagar district and Kanpur division. It is the second largest industrial town in north India, following Delhi.कानपुर में बहुत कुछ रोने को है.बिजली,पानी,सीवर,सुअर,जाम,कीचङ की समस्या.बहुत कुछ है यहां जो यह शहर छोङकर जाने वाले को बहाने देता है.यह शहर तमाम सुविधाओं में उन शहरों से पीछे है जिनका विकास अमरबेल की तरह शासन के सहारे हुआ है.पर इस शहर की सबसे बङी ताकत यही है कि जिसको कहीं सहारा नहीं मिलता उनको यह शहर अपना लेता है.जब तक यह ताकत इस शहर में बनी रहेगी तब तक कनपुरिया(झाङे रहो कलट्टरगंज) ठसक भी बनी रहेगी.

कानपुराइट्स लाइन हाजिर


– पुराने नोट जमा करने और नए लेने के चक्कर में लाखों लोग काम छोड़कर बैंकों की लाइन में लगे
– एटीएम न चलने से बैंकों के बाहर और बढ़ी भीड़, लगातार काम से बैंक कर्मचारी भी हो रहे पस्त
– शुक्रवार देर शाम तक बैंकों और एटीएम के जरिए चार हजार करोड़ रुपए का हुआ ट्रांजेक्शन

कानपुर, मेस्टनरोड बाजार का हाल:


कानपुर: मेस्टन रोड बाजार दो थानों के बीच में है लेकिन यातायात व्यवस्था सबसे ज्यादा ध्वस्त है। अगर आप मेस्टन रोड होते हुए मूलगंज की ओर जा रहे हैं तो जाम में फंसना तय है। त्योहारी सीजन में खरीदारी करने वालों की भीड़ तो मिलेगी, साथ ही बीच सड़क पार्किग में खड़े वाहन और फुटपाथ तक सजी दुकानें आपका रास्ता रोकेंगी लेकिन इससे निजात दिलाने को कोई आगे नहीं आता। मेस्टन रोड मुख्य रूप से असलहा बाजार, बिसातखाना, रेडीमेड का बाजार है। यहीं से प्रयाग नारायण शिवाला, चश्मा मार्केट, किताब मार्केट, इलेक्ट्रानिक्स का बड़ा बाजार मनीराम बगिया, चौक सराफा आदि जाने के रास्ते हैं।

देशभर का जायका बढ़ा रहा कनपुरिया मसाला


नयागंज किराना बाजार यूपी की सबसे बड़ी मण्डी है। यहां से पूर्वाचल और बिहार के राज्यों में खड़ा मसाला भेजा जाता है। खड़े मसालों में मेहनत करने और खुले मसालों में क्वालिटी कमजोर होने के कारण जनता का रुझान इससे हटता जा रहा है। इसके चलते पैकिंग और ब्रांडेड मसालों की डिमाण्ड तेजी से बढ़ रही है। छोटी पैकिंग होने के कारण भी जनता का रुझान ज्यादा है।