यह नजारा देख सब रह गए दंग, गंगा-जमुनी तहजीब का दिखा अद्भुत नजारा!


हॉकी, लाठी, डंडे, फरसे, तलवार और स्टेनगन से लैस दिखे लोग, मुस्लिम भाईयों ने शोभायात्रा का जोरदार स्वागत किया। कानपुर. भगवान राम के जन्मदिन के अवसर पर कानपुर में गंगा-जमुनी तहजीब का अद्भुत नजारा देखने को मिला। क्या हिन्दू, क्या मुस्लिम सभी संप्रदायिक एकता की एक ही डोर में बंधे थे। गणेश शंकर विद्यार्थी के…

कानपूर ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल


कानपुर में कई दर्शनीय स्थल हैं। वैसे तो यह शहर औद्योगिक नगर है, किंतु ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल भी यहां हैं। इनमें हैं: नानाराव पार्क (कम्पनी बाग), चिड़ियाघर, राधा-कृष्ण मन्दिर, सनाधर्म मन्दिर, काँच का मन्दिर, श्री हनुमान मन्दिर पनकी, सिद्धनाथ मन्दिर, जाजमऊ आनन्देश्वर मन्दिर परमट, जागेश्वर मन्दिर चिड़ियाघर के पास, सिद्धेश्वर मन्दिर चौबेपुर के पास,…

कछुआ तालाब में आपका स्वागत है


कानपुर। आमतौर पर घरों में देखा जाता है कि लोग मछली व कछुआ इसलिए पालते है कि सुबह-सुबह इनको देखने पर पूरा दिन शुभ रहता है लेकिन शहर के 364 साल पुराने तालाब में शहंशाह कछुआ को इसलिए देखने के लिए बेताब रहते है कि बिगड़ा हुआ काम कम बन जाता है। हालांकि यह कछुआ…

कानपुर के गंगा किनारे बने बाबा घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बनाते थे ठंडाई।


कानपुर के गंगा किनारे बने बाबा घाट को शायद ही कोई जानता होगा, लेकिन एक समय था जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने दोस्तों के साथ इस घाट पर घंटो समय गुजारा करते थे। वो यहां दोस्तों के साथ मस्ती करते, गीत गाते और घंटो ठंडाई पीसते थे। आज यह घाट बदहाल…

कॉलेज के दिनों में ऐसी थी अटल के लिए दीवानगी


पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सुनने के लिए कॉलेज के दिनों में लड़के और लड़कियां दीवाने थे। ये उन दिनों की बात है जब जाने-माने कवि, राजनीतिज्ञ, दार्शनिक अटल जी कानपुर के डीएवी कॉलेज में अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर रहे थे। कॉलेज के दिनों का एक रोचक किस्सा सुनाते हुए उनके दोस्तों ने…

शहर की यादगार है ‘ऑल सोल्स कैथेडरल’


कानपुर मेमोरियल चर्च जिसे ‘ऑल सोल्स कैथेडरल’ के नाम से जाना जाता है। यह शहर का सबसे पुराना चर्च है। यह करीब 141 वर्ष पुराना है। चर्च वास्तव में उन मसीही लोगों की याद में बनाया गया था जो कानपुर की घेराबन्दी के दौरान मारे गए थे। कैंट में स्थापित यह चर्च आर्किटेक्ट के आधार…

कानपुर, मेस्टनरोड बाजार का हाल:


कानपुर: मेस्टन रोड बाजार दो थानों के बीच में है लेकिन यातायात व्यवस्था सबसे ज्यादा ध्वस्त है। अगर आप मेस्टन रोड होते हुए मूलगंज की ओर जा रहे हैं तो जाम में फंसना तय है। त्योहारी सीजन में खरीदारी करने वालों की भीड़ तो मिलेगी, साथ ही बीच सड़क पार्किग में खड़े वाहन और फुटपाथ तक सजी दुकानें आपका रास्ता रोकेंगी लेकिन इससे निजात दिलाने को कोई आगे नहीं आता। मेस्टन रोड मुख्य रूप से असलहा बाजार, बिसातखाना, रेडीमेड का बाजार है। यहीं से प्रयाग नारायण शिवाला, चश्मा मार्केट, किताब मार्केट, इलेक्ट्रानिक्स का बड़ा बाजार मनीराम बगिया, चौक सराफा आदि जाने के रास्ते हैं।

थ्री डी में करें हजरत अली के रौजे की जियारत


इस्लामी नए साल हिजरी की शुरुआत के मौके पर जमीअत उलमा के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना मतीनुल हक ओसामा कासिमी ने कहा कि इस्लामी कैलेण्डर से हमारी इबादतें जुड़ी हैं। हम रोजा, ईद और हज जैसी सभी इबादतों को इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से अदा करते हैं़। इस्लामी कैलेण्डर की हिफाजत हम सभी मुसलमानों का दायित्व है।

कानपुर का महात्मा गांधी जी से गहरा नाता रहा है


कानपुर का नरवल का गणेश सेवा आश्रम आज भी महात्मा गांधी के सपनों को सजोए हुए है। 1934 में यहां महात्मा गांधी आए थे। कनपुरियों ने तब कस्तूरबा ट्रस्ट के लिए 3592 रुपए 13 आना एकत्र करके दिए थे। प्रार्थना सभा के दौरान इकट्ठा किए की गई सहायता राशि में 1541 रुपए उद्यमी कमलापत सिंहानिया ने दिए थे। महात्मा गांधी ने इस धन का एक हिस्सा नरवल आश्रम में कस्तूरबा भवन के लिए दे दिया था।

Bhagat Singh का क्या है रिश्ता कानपुर से?


कानपुर से छपने वाले गणेश शंकर विद्यार्थी के क्रांतिकारी अख़बार ‘प्रताप’ में 1925 में कानपुर गए थे। पीलखाना में प्रताप की प्रेस थी। वे उसके पास ही रहते थे। वे रामनारायण बाजार में भी रहे। वे नया गंज के नेशनल स्कूल में पढ़ाते भी थे। यानी कि उनका इन दोनों शहरों से खास तरह का संबंध रहा। पर, अफसोस कि इन दोनों शहरों में वे जिधर भी रहे या उन्होंने काम किया,बैठकों में शामिल हुए, उधर उनका कोई नामों-निशान तक नहीं है। उऩ्हें एकाध जगह पर बहुत मामूली तरीके से याद करने की कोशिश की गई है।

कानपुर तेरे कितने नाम

कानपुर तेरे कितने नाम


कानपुर के नामों के बारे में लोगों की जानकारी के लिये यह लेख मनोज कपूरजी के प्रति आभार व्यक्त करते हुये पोस्ट किया जा रहा है।

कानपुर कब स्थापित हुआ


कानपुर कब स्थापित हुआ , इस प्रश्न पर आज भी इतिहासकारों में मतैक्य नहीं है, परन्तु इस मुद्दे पर सभी एकमत हैं कि ‘कानपुर जनपद’ की राजकीय स्थापना २४ मार्च, १८०३ ईसवी को ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने की।