आजादी के दीवानों की याद में मनाया जाता है हटिया होली मेला

कानपुर : क्रांतिकारियोंकी ये धरती राष्ट्रप्रेम के उसी रंग में आज भी सराबोर है। दुनिया के लिए होली सिर्फ धार्मिक पर्व होगा, लेकिन शायद कानपुर इकलौता ऐसा शहर है, जहां इसे राष्ट्रप्रेम के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। ब्रिटिश हुकूमत की ज्यादती के खिलाफ शुरू हुई परंपरा में हटिया होली मेला (गंगा…

माघी पूर्णिमा पर गंगा बैराज पर श्री कोटि लक्ष्मी महायज्ञ

कानपुर कार्यालय संवाददाता -माघी पूर्णिमा पर गंगा बैराज पर चल रहे श्री कोटि लक्ष्मी महायज्ञ में लगभग पचास हजार लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। आयोजकों की माने तो यज्ञ क्षेत्र में लगी पांच रसोइयों में तैयारियां तेज हो गई हैं। अनुमान है कि शुक्रवार को गंगा बैराज सहित शहर के अन्य…

‘यहां सब ज्ञानी है’ फिल्म में दिखेगा कनपुरिया फक्कड़पन

कानपुर की गलियों में शूट की गई फिल्म यहां सब ज्ञानी है जल्द ही पर्दे पर दिखेगी। बिरहानारोड स्थित गनेश प्रसाद धर्मशाला का आंगन भी फिल्म में दिखेगा। सीमेंट की जालियों, नक्काशीदार वास्तुकला पर आधारित पुराने क्षेत्र के इस धर्मशाला भवन के कई हिस्से में दृशय़ फिल्माएं गए हैं। शहर के सिद्धहस्त रंगकर्मी राधेशय़ाम भी…

स्टेशन का प्लेटफॉर्म-4 ‘पंजाब’ में बदला

सेंट्रल स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर चार सोमवार शाम ‘पंजाब’ में बदल गया। दिल्ली से पटना साहिब जा रहीं तीन विशेष ट्रेनें जैसे ही यहां दाखिल हुईं। पूरा स्टेशन ‘जो बोले सोनिहाल, सतश्री अकाल’ से गूंज उठा। चारों ओर जत्थेबंदियां शबद-कीर्तन कर माहौल को रूहानी बना रही थीं। साहिब श्री गुरु गो¨वद सिंह जी महाराज के…

कानपुर के गंगा किनारे बने बाबा घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बनाते थे ठंडाई।

कानपुर के गंगा किनारे बने बाबा घाट को शायद ही कोई जानता होगा, लेकिन एक समय था जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने दोस्तों के साथ इस घाट पर घंटो समय गुजारा करते थे। वो यहां दोस्तों के साथ मस्ती करते, गीत गाते और घंटो ठंडाई पीसते थे। आज यह घाट बदहाल…

चलो घूम के आएं, जश्न मनाएं

क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों का आगाज हो चुका है। छुट्टियों पर घूमने-फिरने में खर्च करने वाले भी बोरिया-बिस्तर बांधकर निकल पड़े हैं या निकलने की तैयारी में हैं। खास बात ये है कि नोटबंदी का असर टूरिज्म के बाजार में न के बराबर है। अभी तक विभिन्न ट्रैवल कंपनियों के जरिए नौ हजार…

घर घर क्रिसमस का उल्लास

क्रिसमस या बड़ा दिन ईसा मसीह या यीशु के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला पर्व है। यह 25 दिसम्बर को पड़ता है और इस दिन लगभग संपूर्ण विश्व मे अवकाश रहता है। क्रिसमस से 12 दिन के उत्सव क्रिसमसटाइड की भी शुरुआत होती है। एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का…

शहर की यादगार है ‘ऑल सोल्स कैथेडरल’

कानपुर मेमोरियल चर्च जिसे ‘ऑल सोल्स कैथेडरल’ के नाम से जाना जाता है। यह शहर का सबसे पुराना चर्च है। यह करीब 141 वर्ष पुराना है। चर्च वास्तव में उन मसीही लोगों की याद में बनाया गया था जो कानपुर की घेराबन्दी के दौरान मारे गए थे। कैंट में स्थापित यह चर्च आर्किटेक्ट के आधार…

जश्न-ए-चिरागां:हर पल नूर छा गया, खुशियां मनाओ, बारारबीउल आ गया

मोहसिने इंसानियत हजरत मोहम्मद साहब की यौम-ए-विलादत (पैदाइश) के मौके पर शहर में जश्न-ए-चिरागां मनाया गया। इस मौके पर हर सिम्त (दिशा) नूर की बारिश के साथ ‘सरकार की आमद मरहबा और ‘हर पल नूर छा गया, खुशियां मनाओ, बारारबीउल आ गया जैसे पाक नग्मे गूजते रहे।

कानपुर : में चल रहे पुस्तक मेले में कवियों ने रचनाओं से समां बांधा।

हमारे दिल के थियेटर में फिल्म की रील लगती हो, उजाला रूह को दे दे चमकती नील लगती हो, सिविल लाइन अगर हो तुम मुङो बर्रा समझ लेना, मैं घंटाघर कसम से तुम तो मोतीझील लगती हो। ये पंक्तियां युवा कवि धीरज सिंह चंदन ने पढ़ीं तो पूरा पंडाल तालियों की आवाज से गूंज उठा।…

कानपुर : आज मोतीझील में दो लाख लोग छकेंगे लंगर

कानपुर: श्री गुरु नानक देव जी महाराज के प्रकाशोत्सव पर सोमवार को दो लाख लोग मोतीझील में लंगर छकेंगे।1श्री गुरु सिंह सभा लाटुश रोड द्वारा गुरु का 548वां तीन दिवसीय प्रकाशोत्सव मनाया जा रहा है। सोमवार को प्रकाशोत्सव का अंतिम दिन है। रविवार को बड़ी संख्या में महिलाएं मोतीझील प्रांगण में लंगर बनाने में जुटी रहीं। हजारों महिलाएं घरों से भी रोटियां बनाकर ला रही हैं।

कंपू में पहरेदार के रूप में विराजमान हैं दशानन

कानपुर कार्यालय : दशहरे पर शहर का प्राचीन दशानन मंदिर भी भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा। पूरे विश्व में सिर्फ दो जगहों पर रावण का पूजन होता है। इसमें विदिशा के बाद अपना शहर कानपुर भी है। शिवाला मंदिर में दशानन शिव व शक्ति के पहरेदार के रूप में स्थापित है। मंदिर के…

कानपूर : डांडिया की मस्ती में रम गई युवा टोली

हाथों में डांडिया के साथ फ्लोर पांव कुछ इस तरह थिरके, पूरी आबोहवा मदमस्त हो गई। लोग डांडिया की धुनों में यूं खो गए कि उन्हें पता ही नहीं चला कि कब वीनस डांडिया रास का सुरूर चढ़ता गया। सब कुछ भूलकर लोग बस डांडिया की मस्ती में खोए रहे।