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कानपुर एक परिचय: - Kanpur is the 12th most populous city in India. It is the administrative headquarters of Kanpur Nagar district and Kanpur division. It is the second largest industrial town in north India, following Delhi.कानपुर में बहुत कुछ रोने को है.बिजली,पानी,सीवर,सुअर,जाम,कीचङ की समस्या.बहुत कुछ है यहां जो यह शहर छोङकर जाने वाले को बहाने देता है.यह शहर तमाम सुविधाओं में उन शहरों से पीछे है जिनका विकास अमरबेल की तरह शासन के सहारे हुआ है.पर इस शहर की सबसे बङी ताकत यही है कि जिसको कहीं सहारा नहीं मिलता उनको यह शहर अपना लेता है.जब तक यह ताकत इस शहर में बनी रहेगी तब तक कनपुरिया(झाङे रहो कलट्टरगंज) ठसक भी बनी रहेगी.

कानपूर ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल - कानपुर में कई दर्शनीय स्थल हैं। वैसे तो यह शहर औद्योगिक नगर है, किंतु ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल भी यहां हैं। इनमें हैं: नानाराव पार्क (कम्पनी बाग), चिड़ियाघर, राधा-कृष्ण मन्दिर, सनाधर्म मन्दिर, काँच का मन्दिर, श्री हनुमान मन्दिर पनकी, सिद्धनाथ मन्दिर, जाजमऊ आनन्देश्वर मन्दिर परमट, जागेश्वर मन्दिर चिड़ियाघर के पास, सिद्धेश्वर मन्दिर चौबेपुर के पास,…

tourist Information Kanpur :Tourist Guide - Tourist Information:पर्यटकों के लिए जानकारी :KANPUR  is a beautiful city with eye catching sceneries everywhere you look. Kanpur is situated on the banks of the sacred river Ganga. Kanpur is an important industrial center of Uttar Pradesh. Kanpur is extremely well known for its leather industries. As a matter of fact Kanpur is synonymous to leather.

Kanpur History : - After 1857, the development of Kannpur (present Kanpur) was even more phenomenal. The city was abbreviated with Caawnpore in 1879, which after several spelling changes becomes Kanpur.Kanpur Diwas was celebrated at UP Stock Exchange where historical and cultural significance of the city was discussed.

Kanpur District Political Information - Kanpur District: Kanpur District (Kanpur Nagar District) is one of the districts of the Uttar Pradesh state of India. It is a part of Kanpur division and its district headquarters is Kanpur.Kanpur District was divided into two district namely Kanpur-nagar and Kanpur-Dehat in year 1977. Reunited again in year 1979. Again separated in year 1981

कानपुर में मेट्रो - कानपुर। जिले में अगले कुछ सालों में मेट्रो रेल सेवा शुरू हो जाएगी। कानपुर लगभग एक सदी बाद अपने इण्टिग्रेटेड ट्रान्सपोर्ट सिस्टम को अपडेट होते देखेंगा। इतिहास गवाह है कि इस औद्योगिक शहर में सन् 1933 तक ट्राम चला करती थी और इसे दिल्ली से पहले कानपुर में शुरू किया गया था। लेकिन बहुत कम लोग जानते होगें कि एक सौ दस साल पहले कानपुर में अंग्रेजों ने इण्टिग्रेटेड ट्रान्सपोर्ट सिस्टम लागू किया था। तब यहां जून 1907 में ट्राम सेवा शुरू की गयी थी जिसने कानपुर को वैश्विक पहचान दी। जब कानपुर को ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने अपना सेण्टर बनाया तो उन्होंने आबादी के बढ़ने पर सस्ते परिवहन के रूप में ट्राम चलायी थी। उस दौर में यह सेवा दिल्ली से पहले आयी और ट्रामका डबल ट्रैक कानपुर रेलवे स्टेशन से गंगा नदी के सरसैया घाट तक बिछाया गया। कानपुर में ट्राम का सफर केवल 26 साल चला। इसे जून 1907 में शुरू किया गया तो 16 मई 1933 को बन्द कर दिया गया। उस समय केवल एक रूट पर सिंगल कोच वाली बीस ट्राम चलायी गयी। लगभग चार मील लम्बे इस रूट की खास बात यह थी कि यह शहर के मुख्य आबादी वाले इलाके को पूरी तरह कवर करता था। बाहर से आने वाले तीर्थयात्री ट्राम पर सवार होकर गंगा जी तक पहुंचते थे तो कपड़ा व्यापारी जनरल गंज स्थित मुख्य कपड़ा बाजार।

कानपुर के लिए गौरव का क्षण : कानपुर के रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति - एनडीए की ओर से बिहार के राज्यपाल रामनाथ को¨वद को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी घोषित करते ही कानपुर में खुशी की लहर दौड़ गई। भाजपाइयों के साथ-साथ उनसे खास जुड़ाव रखने वाले लोग जश्न मनाने में जुट गए। दोपहर ढाई बजे के बाद पार्टी दफ्तर नवीन मार्केट में पार्टीजनों का जमावड़ा शुरू होने लगा था।…

झाड़े रहो कलट्टरगंज, मण्डी खुली बजाजा बंद - झाड़े रहो कलट्टरगंज मण्डी खुली बजाजा बंदकनपुरिया जुमले …का किस्सा यहां पेश है।ऐसा माना जाता है कि कनपुरिया बाई डिफ़ाल्ट मस्त होता, खुराफ़ाती है, हाजिर जवाब होता है।(जिन कनपुरियों को इससे एतराज है वे इसका खंडन कर दें , हम उनको अपवाद मान लेंगे।) मस्ती वाले नये-नये उछालने में इस् शहर् का कोई जोड़ नहीं है। गुरू, चिकाई, लौझड़पन और न जाने कितने सहज अनौपचारिक शब्द यहां के माने जाते हैं। मुन्नू गुरू तो नये शब्द गढ़ने के उस्ताद थे। लटरपाल, रेजरहरामी, गौतम बुद्धि जैसे अनगिनत शब्द् उनके नाम से चलते हैं। पिछले दिनों होली पर हुयी एक गोष्ठी में उनको याद करते हुये गीतकार अंसार कम्बरी ने एक गजल ही सुना दी- समुन्दर में सुनामी आ न जाये/ कोई रेजर हरामी आ न जाये।

इतिहास के पन्ने गवाह हैं कि ग्वालटोली में महात्मा गांधी ने फावड़ा व झाडू उठाकर स्वयं सफाई की - राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 148वीं जयंती पर केंद्र सरकार के प्रोत्साहन से भारत में गांधी जयंती को ‘स्वच्छता ही सेवा’ के रूप में मनाया जा रहा है। महात्मा गांधी ने स्वच्छता कार्यक्रम की शुरुआत 1934 में ही कर दी थी जब वह यूपी के सबसे बड़े औद्योगिक शहर कानपुर आए थे। इस शहर में उन्होंने मलिन…
कानपुर का महात्मा गांधी जी से गहरा नाता रहा है - कानपुर का नरवल का गणेश सेवा आश्रम आज भी महात्मा गांधी के सपनों को सजोए हुए है। 1934 में यहां महात्मा गांधी आए थे। कनपुरियों ने तब कस्तूरबा ट्रस्ट के लिए 3592 रुपए 13 आना एकत्र करके दिए थे। प्रार्थना सभा के दौरान इकट्ठा किए की गई सहायता राशि में 1541 रुपए उद्यमी कमलापत सिंहानिया ने दिए थे। महात्मा गांधी ने इस धन का एक हिस्सा नरवल आश्रम में कस्तूरबा भवन के लिए दे दिया था।

कानपुर। गणेश शंकर विद्यार्थी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अनूठे लड़ाके थे - Ganesh Shankar Vidyarthi :इस क्रांतिकारी का औजार बंदूक नहीं कलम थी, इंसानों को बचाने के लिए दे दी जान

Bhagat Singh का क्या है रिश्ता कानपुर से? - कानपुर से छपने वाले गणेश शंकर विद्यार्थी के क्रांतिकारी अख़बार ‘प्रताप' में 1925 में कानपुर गए थे। पीलखाना में प्रताप की प्रेस थी। वे उसके पास ही रहते थे। वे रामनारायण बाजार में भी रहे। वे नया गंज के नेशनल स्कूल में पढ़ाते भी थे। यानी कि उनका इन दोनों शहरों से खास तरह का संबंध रहा। पर, अफसोस कि इन दोनों शहरों में वे जिधर भी रहे या उन्होंने काम किया,बैठकों में शामिल हुए, उधर उनका कोई नामों-निशान तक नहीं है। उऩ्हें एकाध जगह पर बहुत मामूली तरीके से याद करने की कोशिश की गई है।

कानपुर के गंगा किनारे बने बाबा घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बनाते थे ठंडाई। - कानपुर के गंगा किनारे बने बाबा घाट को शायद ही कोई जानता होगा, लेकिन एक समय था जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने दोस्तों के साथ इस घाट पर घंटो समय गुजारा करते थे। वो यहां दोस्तों के साथ मस्ती करते, गीत गाते और घंटो ठंडाई पीसते थे। आज यह घाट बदहाल…

कॉलेज के दिनों में ऐसी थी अटल के लिए दीवानगी - पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सुनने के लिए कॉलेज के दिनों में लड़के और लड़कियां दीवाने थे। ये उन दिनों की बात है जब जाने-माने कवि, राजनीतिज्ञ, दार्शनिक अटल जी कानपुर के डीएवी कॉलेज में अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर रहे थे। कॉलेज के दिनों का एक रोचक किस्सा सुनाते हुए उनके दोस्तों ने…

आजादी के दीवानों की याद में मनाया जाता है हटिया होली मेला - कानपुर : क्रांतिकारियोंकी ये धरती राष्ट्रप्रेम के उसी रंग में आज भी सराबोर है। दुनिया के लिए होली सिर्फ धार्मिक पर्व होगा, लेकिन शायद कानपुर इकलौता ऐसा शहर है, जहां इसे राष्ट्रप्रेम के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। ब्रिटिश हुकूमत की ज्यादती के खिलाफ शुरू हुई परंपरा में हटिया होली मेला (गंगा…

कानपुर आइए यजमान, नवरात्रि में इन मंदिरों के करें दर्शन, होगी हर मुराद पूरी - कानपुर. शहर में कई एतिहासिक मंदिर हैं। मुगलों से लेकर अंग्रेजों के किले और महल हैं। एशिया के इस मैनचेस्टर में 500 से लेकर 2000 साल प्रतिष्ठित नौ देवी माता के 6 मंदिर है।इन मंदिरों में उमड़ता है आस्‍था का सैलाब, जानें क्‍या है महत्‍व-- हर मां के मंदिर का अपना अलग महत्व है। नवरात्र पर्व पर इन सभी मंदिरों में हरसाल सैकड़ों की तादाद में भक्त आते हैं और मन्नतें मांगते हैं। अपने दर पर आने वाले भक्तों को मां खाली हाथ नहीं लौटाती उनकी हर मुराद वह पूरी करती हैं। इन 6 मंदिरों में स्थापित मां की मूर्ति पर उनके यहां पर विराजने की कहानी कुछ खास है। यहां के प्राचीन मंदिरों में मां बारादेवी, मां बुद्धादेवी, मां वैभव लक्ष्मी, मां तपेश्वरी देवी, मां जंगली देवी और मां कुष्मांडा हैं। इन मंदिरों में सिर्फ कानपुर के भक्तों की ही नहीं, बल्कि दूर-दूर और दूसरे जिलों से भी भक्त दर्शन-पूजन करने के लिए आते हैं।

120 साल पुराना है ‘टर्र’ का मेला - ईद के दूसरे दिन मंगलवार को भी लोग एक दूसरे के घर गए और ईद की मुबारकबाद दी। चमनगंज में ‘टर्र’ का मेला लगा जहां बच्चों और बड़ों ने खूब एन्ज्वॉय किया। मिट्टी के खिलौने हमेशा की तरह आकर्षण का केंद्र रहे। बच्चों ने खूब झूला झूला। इस मौके की खास डिश ‘लुचई’ भी खूब…
ईदागाह की हिफाजद करती आ रही तीसरी पीढ़ी, गंगा-जमुनी की मिसाल बनी दौलतदेवी - एक मिशाल कानपुर में देखने को मिली जहां एक हिन्दू परिवार की तीसरी पीढ़ी एतिहासिक बड़ी ईदगाह की रखवाली के साथ ही साफ सफाई करती आ रही है

जिस कनपुरिए के लिए धडक़ता है प्रीति जिंटा का दिल, उसे अमीषा पटेल ने बोल दिया आई लव यू - कानपुर . किस्मत वाकई शानदार है। देश में करोड़ों लोगों का दिल प्रीति जिंटा और अमीषा पटेल की शोख अदाओं पर धडक़ता है। एक बारगी मिलने और स्पर्श करने का दिल करता है, लेकिन कनपुरिया मिजाज वाला एक ऐसा भी है, जिसकी खूबसूरती पर नामचीन अभिनेत्रियों फिदा हैं। खुलेआम बाहों में समेटने की इच्छा जताकर…

विश्वकर्मा जयंती पर शहर की औद्योगिक जरूरतों और समस्याओं पर नजर - विश्वकर्मा जयंती पर शहर की औद्योगिक जरूरतों और समस्याओं पर नजर डालें तो मिलेगा समस्याओं का अंबार, लेकिन कानपुर इन दुश्वारियों में फिर भी चमक रहा है। चिमनियों का शहर कानपुर आज नए कलेवर में खड़ा है। इस बार शहर के औद्योगिक शान की कमान संभाली है रेडीमेड गारमेंट्स, होजरी, सैडलरी, प्लास्टिक, खाद्य तेल, इंजीनियरिंग,…

प्राचीन सभ्यताओं और अजब-गजब मंदिरों के लिए जाना जाता है ऐतिहासिक महानगर का ये इलाका - देश के ऐतिहासिक महानगरों में शामिल कानपुर का घाटमपुर इलाका प्राचीन सभ्यताओं और अजब-गजब मंदिरों के लिए जाना जाता है। यहां चंदेल वंशीय राजाओें द्वारा बनवाया गया लाखौरी ईटों का शिव मंदिर भी है। सबसे ज्यादा आकर्षक का केंद्र मानसूनी पत्थरों से बना जगन्नाथ मंदिर है। तो आइये जानते हैं घाटमपुर और भीतरगांव के कुछ ऐतिहासिक…
बॉलीवुड को पसंद आ रहा ये शहर, हो चुकी कई फिल्मों की शूटिंग - बॉलीवुड में कानपुर की लोकेशन भी अपनी जगह बनाने लगी हैं। पिछले कुछ महीनों में शहर में कई डायरेक्टर आए जिन्होंने यहां पर अपनी फिल्मों की शूटिंग की। सलमान खान से लेकर कुणाल राय कपूर तक हर कोई यहां शूटिंग कर चुका है। बंटी – बबली, दबंग, हम दोनों होंगे कामयाब, कटियाबाज कुछ फिल्में हैं…
कानपुर के रहने वाले इसरार अहमद फिल्म ‘सुपर जासूस’ बना रहे राजपाल-सुनील पाल, इन दिनों कानपुर में कर रहे शूटिंग - कानपुर के रहने वाले इसरार अहमद फिल्म ‘सुपर जासूस’ बना रहे ,बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव और कॉमेडियन सुनील पाल इन दिनों अपनी फिल्म ‘सुपर जासूस’ की शूटिंग में कानपुर पहुंच गए हैं। बुधवार को जाजमऊ के एक फॉर्म हाउस व जीटी रोड के एक होटल में फिल्म के कुछ सीन शूट किए गए हैं। राजपाल यादव ने…
आयुध दिवस पर लगी प्रदर्शनी, ऑर्डनेंस फैक्टियों की काबिलियत व सेना के शौर्य से वाकिफ हुआ शहर - गरजती रही तोप, हर हाथ में था हथियार कानपुर : एक तरफ धनुष तोप लगातार गोले दाग रही थी। तेज धमाके की आवाज के साथ भारतीय सेना के जवानों का साहस-शौर्य नजर आ रहा था। वहीं, दूसरी ओर किसी के हाथ में लाइट मशीनगन, किसी के हाथ रिवाल्वर तो कोई रायफल थामे खड़ा था। एक…
इस उद्योगपति ने पानी के जहाजों के नाम रखे ‘कानपुर’ - यूपी के कानपुर शहर में गंगा के घाटों के पुनरुद्धार का जिम्मा लेने वाले शिपिंग (पानी के जहाज) कंपनी के मालिक रवि कुमार मेहरोत्रा की अपनी माटी से मोहब्बत बेमिसाल है। खुद के खड़े किए हुए जहाज के कारोबार में तब्दीली का मौका आया तो… उन्होंने दो जहाज इसलिए बचा लिए, क्योंकि उनमें से एक…
Bollywood की इन बड़ी फिल्मों में रहा ‘कनपुरिया कनेक्शन’ - भारतीय सिनेमा और टेलीविजन इंडस्ट्री में यूपी की लैंग्वेज और स्टाइल खूब पसंद की जाती है। लेकिन आज हम आपको बता रहें हैं ऐसे शहर के बारे में जो बॉलीवुड फिल्मों में छाया हुआ है। यहां बात हो रही है मैनचेस्टर ऑफ द ईस्ट कहे जाने वाले कानपुर शहर की। जानें बॉलीवुड की उन बड़ी…

 

 

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